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ramayan 6.12.40: तुम भोग-विलास में रहो, उत्तम वारुणी का पान करो और निश्चिंत होकर अपने हित के काम करो। जब मैं राम को यमलोक भेज दूँगा, तब सीता दीर्घकाल तक तुम्हारी दासी रहेगी।॥40॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.12.40 
रमस्व कामं पिब चाग्रॺवारुणीं
कुरुष्व कार्याणि हितानि विज्वर:।
मया तु रामे गमिते यमक्षयं
चिराय सीता वशगा भविष्यति॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तुम भोग-विलास में रहो, उत्तम वारुणी का पान करो और निश्चिंत होकर अपने हित के काम करो। जब मैं राम को यमलोक भेज दूँगा, तब सीता दीर्घकाल तक तुम्हारी दासी रहेगी।॥40॥
 
You enjoy yourself, drink the excellent Varuni and do things that are good for you without worry. When I send Rama to Yamaloka, Sita will become your slave for a long time.'॥ 40॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्वादश: सर्ग: ॥ १ २॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें बारहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ २॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)