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ramayan 6.12.35: अनघ! यद्यपि तूने शत्रुओं के साथ मिलकर गलत काम आरम्भ कर दिया है, तथापि मैं तेरे शत्रुओं का नाश करके सबको सुधार दूँगा॥35॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.12.35 
तस्मात् त्वया समारब्धं कर्म ह्यप्रतिमं परै:।
अहं समीकरिष्यामि हत्वा शत्रूंस्तवानघ॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अनघ! यद्यपि तूने शत्रुओं के साथ मिलकर गलत काम आरम्भ कर दिया है, तथापि मैं तेरे शत्रुओं का नाश करके सबको सुधार दूँगा॥35॥
 
Anagha! Although you have started wrong deeds with the enemies, yet I will destroy your enemies and set everyone right. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)