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ramayan 6.12.32: जो पहले करने योग्य कार्यों को टालना चाहता है और बाद में करने योग्य कार्यों को पहले ही कर लेता है, वह उचित और अनुचित का ज्ञान नहीं रखता॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 6.12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 12: रावण का सीता हरण का प्रसंग बताना , कुम्भकर्ण का पहले तो उसे फटकारना, फिर समस्त शत्रुओं के वध का स्वयं ही भार उठाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.12.32 
य: पश्चात् पूर्वकार्याणि कर्माण्यभिचिकीर्षति।
पूर्वं चापरकार्याणि स न वेद नयानयौ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो पहले करने योग्य कार्यों को टालना चाहता है और बाद में करने योग्य कार्यों को पहले ही कर लेता है, वह उचित और अनुचित का ज्ञान नहीं रखता॥ 32॥
 
He who wants to postpone the tasks that should be done first and does the tasks that should be done later in advance, he does not know what is right and what is wrong.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)