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ramayan 6.119.9: महादेवजी के ये वचन सुनकर लक्ष्मणजी ने श्री रघुनाथजी सहित विमान में ऊँचे स्थान पर बैठकर अपने पिता को प्रणाम किया।   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.119.9 
महादेववच: श्रुत्वा राघव: सहलक्ष्मण:।
विमानशिखरस्थस्य प्रणाममकरोत् पितु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महादेवजी के ये वचन सुनकर लक्ष्मणजी ने श्री रघुनाथजी सहित विमान में ऊँचे स्थान पर बैठकर अपने पिता को प्रणाम किया।
 
On hearing these words from Mahadevji, Lakshmana along with Sri Raghunathji, seated at a high place in the plane, bowed to their father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)