Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.119.7: 'ककुत्स्थकुलनन्दन! देखो, ये विमान पर विराजमान तुम्हारे पिता राजा दशरथ हैं। ये मनुष्यलोक में तुम्हारे सबसे यशस्वी गुरु थे।'   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.119.7 
एष राजा दशरथो विमानस्थ: पिता तव।
काकुत्स्थ मानुषे लोके गुरुस्तव महायशा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'ककुत्स्थकुलनन्दन! देखो, ये विमान पर विराजमान तुम्हारे पिता राजा दशरथ हैं। ये मनुष्यलोक में तुम्हारे सबसे यशस्वी गुरु थे।'
 
‘Kakutsthakulnandan! Look, this is your father King Dasharatha sitting on the plane. He was your most successful guru in the human world. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)