Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.119.4-6: हे पराक्रमी! अब तुम दुःखी भरत को धैर्य प्रदान करके, यशस्वी कौशल्या, कैकेयी और लक्ष्मण की माता सुमित्रा से मिलकर, अयोध्या का राज्य प्राप्त करके, बन्धुओं को आनन्द प्रदान करके, इक्ष्वाकु कुल में अपना वंश स्थापित करके, अश्वमेध यज्ञ करके, उत्तम यश अर्जित करके और ब्राह्मणों को धन देकर अपने परमधाम को जाओ। 4-6॥ | ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पराक्रमी! अब तुम दुःखी भरत को धैर्य प्रदान करके, यशस्वी कौशल्या, कैकेयी और लक्ष्मण की माता सुमित्रा से मिलकर, अयोध्या का राज्य प्राप्त करके, बन्धुओं को आनन्द प्रदान करके, इक्ष्वाकु कुल में अपना वंश स्थापित करके, अश्वमेध यज्ञ करके, उत्तम यश अर्जित करके और ब्राह्मणों को धन देकर अपने परमधाम को जाओ। 4-6॥
Mighty warrior! Now after giving patience to the sad Bharat, meeting the famous Kausalya, Kaikeyi and Lakshmana's mother Sumitra, getting the kingdom of Ayodhya, giving joy to the friends, establishing your dynasty in the Ikshvaku family, performing the Ashwamedha Yagya, earning the best fame and giving wealth to the Brahmins, you should go to your supreme abode. 4-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥