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ramayan 6.119.39: जगत् के महापुरुष दशरथ अद्भुत सौन्दर्य से युक्त थे। उनका शरीर आनन्द से काँप रहा था। वे विमान पर बैठकर सीता सहित अपने दोनों पुत्रों को विदा करके देवराज इन्द्र के लोक को चले गए। 39॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.119.39 
विमानमास्थाय महानुभाव:
श्रिया च संहृष्टतनुर्नृपोत्तम:।
आमन्त्र्य पुत्रौ सह सीतया च
जगाम देवप्रवरस्य लोकम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जगत् के महापुरुष दशरथ अद्भुत सौन्दर्य से युक्त थे। उनका शरीर आनन्द से काँप रहा था। वे विमान पर बैठकर सीता सहित अपने दोनों पुत्रों को विदा करके देवराज इन्द्र के लोक को चले गए। 39॥
 
Dashrath, the great man of the world, was endowed with amazing beauty. His body was trembling with joy. Sitting on the plane, he bid farewell to his two sons along with Sita and went to the world of Devraj Indra. 39॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकोनविंशत्यधिकशततम: सर्ग: ॥ १ १९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ उन्नीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ १९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)