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ramayan 6.119.34: लक्ष्मण से ऐसा कहकर राजा दशरथ ने हाथ जोड़कर खड़ी हुई अपनी पुत्रवधू सीता को 'पुत्री' कहकर कोमल एवं मधुर वाणी में कहा-॥34॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.119.34 
इत्युक्त्वा लक्ष्मणं राजा स्नुषां बद्धाञ्जलिं स्थिताम्।
पुत्रीत्याभाष्य मधुरं शनैरेनामुवाच ह॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण से ऐसा कहकर राजा दशरथ ने हाथ जोड़कर खड़ी हुई अपनी पुत्रवधू सीता को 'पुत्री' कहकर कोमल एवं मधुर वाणी में कहा-॥34॥
 
Having said this to Lakshmana, King Dasharatha addressed his daughter-in-law Sita, who was standing with folded hands, as ‘daughter’ and in a soft and sweet voice said—॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)