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ramayan 6.119.33: "विदेहनन्दिनी सीता के साथ शांतिपूर्वक उनकी सेवा करके तुमने उत्तम धर्माचरण और महान यश का फल प्राप्त किया है।" ॥33॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.119.33 
अवाप्तधर्माचरणं यशश्च विपुलं त्वया।
एवं शुश्रूषताव्यग्रं वैदेह्या सह सीतया॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
"विदेहनन्दिनी सीता के साथ शांतिपूर्वक उनकी सेवा करके तुमने उत्तम धर्माचरण और महान यश का फल प्राप्त किया है।" ॥33॥
 
"By serving them peacefully along with Videhanandini Sita, you have achieved the fruits of perfect religious conduct and great fame." ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)