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ramayan 6.119.28: पुत्र! तुमने विदेहनन्दिनी सीता सहित श्री राम की भक्तिपूर्वक सेवा करके मुझे बहुत प्रसन्न किया है। तुम्हें धर्म का फल प्राप्त हुआ है॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.119.28 
रामं शुश्रूषता भक्त्या वैदेह्या सह सीतया।
कृता मम महाप्रीति: प्राप्तं धर्मफलं च ते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पुत्र! तुमने विदेहनन्दिनी सीता सहित श्री राम की भक्तिपूर्वक सेवा करके मुझे बहुत प्रसन्न किया है। तुम्हें धर्म का फल प्राप्त हुआ है॥ 28॥
 
Son! You have made me very happy by serving Shri Ram with devotion along with Videhanandini Sita. You have received the fruits of Dharma.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)