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ramayan 6.119.26: प्रभु! आपने कैकेयी से कहा था कि मैं आपको पुत्रसहित त्यागती हूँ, आपका वह घोर शाप पुत्रसहित कैकेयी को स्पर्श न करे॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.119.26 
सपुत्रां त्वां त्यजामीति यदुक्ता कैकयी त्वया।
स शाप: कैकयीं घोर: सपुत्रां न स्पृशेत् प्रभो॥ २६॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आपने कैकेयी से कहा था कि मैं आपको पुत्रसहित त्यागती हूँ, आपका वह घोर शाप पुत्रसहित कैकेयी को स्पर्श न करे॥ 26॥
 
Prabhu! You had said to Kaikeyi that I renounce you along with my son, may that severe curse of yours not touch Kaikeyi along with her son.'॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)