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ramayan 6.119.25: जब राजा ने ऐसा कहा, तब श्री रामचन्द्रजी ने हाथ जोड़कर उनसे कहा- 'हे धर्म को जानने वाले राजन! आप कैकेयी और भरत पर प्रसन्न हों - उन दोनों पर आपकी कृपा हो॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.119.25 
इति ब्रुवाणं राजानं राम: प्राञ्जलिरब्रवीत्।
कुरु प्रसादं धर्मज्ञ कैकय्या भरतस्य च॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने ऐसा कहा, तब श्री रामचन्द्रजी ने हाथ जोड़कर उनसे कहा- 'हे धर्म को जानने वाले राजन! आप कैकेयी और भरत पर प्रसन्न हों - उन दोनों पर आपकी कृपा हो॥ 25॥
 
When the king had spoken thus, then Shri Ramchandraji said to him with folded hands- 'O King, who knows the Dharma! May you be pleased with Kaikeyi and Bharata--may you have mercy on them both.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)