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ramayan 6.119.21: भरत अत्यन्त पवित्र, पवित्र और बलवान है। वह तुम्हारे प्रति सच्चा स्नेह रखता है। मैं शीघ्र ही तुम्हारा उसके साथ मिलन देखना चाहता हूँ॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.119.21 
अनुरक्तेन बलिना शुचिना धर्मचारिणा।
इच्छेयं त्वामहं द्रष्टुं भरतेन समागतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरत अत्यन्त पवित्र, पवित्र और बलवान है। वह तुम्हारे प्रति सच्चा स्नेह रखता है। मैं शीघ्र ही तुम्हारा उसके साथ मिलन देखना चाहता हूँ॥ 21॥
 
Bharat is very pious, pure and strong. He has true affection for you. I want to see your union with him soon.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)