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ramayan 6.119.20: रघुनंदन! वे लोग भी कृतज्ञ हैं, जो अयोध्या पहुँचने पर आपको राज्यसिंहासन पर भूमिपाल के रूप में अभिषिक्त होते देखेंगे॥20॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.119.20 
सिद्धार्था: खलु ते राम नरा ये त्वां पुरीं गतम्।
राज्ये चैवाभिषिक्तं च द्रक्ष्यन्ते वसुधाधिपम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
रघुनंदन! वे लोग भी कृतज्ञ हैं, जो अयोध्या पहुँचने पर आपको राज्यसिंहासन पर भूमिपाल के रूप में अभिषिक्त होते देखेंगे॥20॥
 
Ragunandan! Those people are also grateful, who on reaching Ayodhya will see you anointed as Bhumipal on the throne of the kingdom. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)