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ramayan 6.119.17: बेटा! जैसे अष्टावक्र ने अपने पुण्यात्मा पिता कहोल नामक ब्राह्मण को बचाया था, वैसे ही तुम्हारे जैसे महान पुत्र ने मुझे बचाया है॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.119.17 
तारितोऽहं त्वया पुत्र सुपुत्रेण महात्मना।
अष्टावक्रेण धर्मात्मा कहोलो ब्राह्मणो यथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
बेटा! जैसे अष्टावक्र ने अपने पुण्यात्मा पिता कहोल नामक ब्राह्मण को बचाया था, वैसे ही तुम्हारे जैसे महान पुत्र ने मुझे बचाया है॥17॥
 
Son! Just as Ashtavakra had saved his virtuous father, a Brahmin named Kahol, similarly a great son like you has saved me.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)