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ramayan 6.119.15: हे भाषियों में श्रेष्ठ रघुनन्दन! कैकेयी ने आपको वन भेजने के लिए जो वचन कहे थे, वे सब आज भी मेरे हृदय में अंकित हैं॥ 15॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.119.15 
कैकेय्या यानि चोक्तानि वाक्यानि वदतां वर।
तव प्रव्राजनार्थानि स्थितानि हृदये मम॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे भाषियों में श्रेष्ठ रघुनन्दन! कैकेयी ने आपको वन भेजने के लिए जो वचन कहे थे, वे सब आज भी मेरे हृदय में अंकित हैं॥ 15॥
 
O best of speakers, Raghunandan! All the words that Kaikeyi had said to send you to the forest are still etched in my heart.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)