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ramayan 6.119.14: आज तुमने अपने शत्रुओं का संहार करके अपना उद्देश्य प्राप्त कर लिया है और अपना वनवास काल भी पूरा कर लिया है। यह देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है ॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.119.14 
अद्य त्वां निहतामित्रं दृष्ट्वा सम्पूर्णमानसम्।
निस्तीर्णवनवासं च प्रीतिरासीत् परा मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आज तुमने अपने शत्रुओं का संहार करके अपना उद्देश्य प्राप्त कर लिया है और अपना वनवास काल भी पूरा कर लिया है। यह देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है ॥14॥
 
Today you have achieved your goal by killing your enemies and you have also completed your exile period. I am very happy to see this. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)