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ramayan 6.119.13: राम! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। तुम्हारे वियोग में मुझे स्वर्ग के सुख भी प्रिय नहीं लगते और देवताओं द्वारा दिया गया सम्मान भी अच्छा नहीं लगता॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 119: महादेवजी की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण का विमान द्वारा आये हुए राजा दशरथ को प्रणाम करना और दशरथ का दोनों पुत्रों तथा सीता को आवश्यक संदेश दे इन्द्रलोक को जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.119.13 
न मे स्वर्गो बहु मत: सम्मानश्च सुरर्षभै:।
त्वया राम विहीनस्य सत्यं प्रतिशृणोमि ते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राम! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। तुम्हारे वियोग में मुझे स्वर्ग के सुख भी प्रिय नहीं लगते और देवताओं द्वारा दिया गया सम्मान भी अच्छा नहीं लगता॥13॥
 
Rama! I am telling you the truth. Being separated from you, I do not like even the pleasures of heaven or the respect given to me by the gods.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)