श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.117.5 
तत: सहस्ताभरणान् प्रगृह्य विपुलान् भुजान्।
अब्रुवंस्त्रिदशश्रेष्ठा राघवं प्राञ्जलिं स्थितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्री राम हाथ जोड़कर उनके सामने खड़े थे। उन महादेव ने अपनी विशाल, अलंकृत भुजाएँ उठाकर उनसे कहा -॥5॥
 
Lord Shri Ram was standing before him with folded hands. That great deity raised his huge arms adorned with ornaments and spoke to him -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)