श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.117.21 
दिक्षु सर्वासु गगने पर्वतेषु नदीषु च।
सहस्रचरण: श्रीमान् शतशीर्ष: सहस्रदृक्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आप सब दिशाओं में, आकाश में, पर्वतों में और नदियों में विद्यमान हैं। आपके हजारों पैर, सैकड़ों सिर और हजारों नेत्र हैं॥ 21॥
 
‘You exist in all directions, in the sky, in the mountains and in the rivers. You have thousands of feet, hundreds of heads and thousands of eyes.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)