श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.117.20 
प्रभवं निधनं चापि नो विदु: को भवानिति।
दृश्यसे सर्वभूतेषु गोषु च ब्राह्मणेषु च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आपके प्रकट होने और तिरोभाव को कोई नहीं जानता। यहाँ तक कि आप कौन हैं, यह भी कोई नहीं जानता। आप सभी प्राणियों में, गौओं में और ब्राह्मणों में भी दृष्टिगोचर होते हैं॥ 20॥
 
‘No one knows about your appearance and disappearance. No one even knows who you are. You are visible in all living beings, in cows and in Brahmins as well.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)