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ramayan 6.117.2-4: उसी समय विश्रवा के पुत्र यक्षराज कुबेर, पितरों सहित यमराज, हजार नेत्रों वाले देवताओं के स्वामी इन्द्र, जल के स्वामी वरुण, तीन नेत्रों वाले भगवान वृषभध्वज महादेव तथा ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ, सम्पूर्ण जगत् के रचयिता ब्रह्माजी, ये सब देवता सूर्य के समान विमानों द्वारा लंकापुरी में आकर श्री रघुनाथजी के पास गए॥2-4॥   |   ramayan सर्ग 6.117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.117.2-4 
ततो वैश्रवणो राजा यमश्च पितृभि: सह।
सहस्राक्षश्च देवेशो वरुणश्च जलेश्वर:॥ २॥
षडर्धनयन: श्रीमान् महादेवो वृषध्वज:।
कर्ता सर्वस्य लोकस्य ब्रह्मा ब्रह्मविदां वर:॥ ३॥
एते सर्वे समागम्य विमानै: सूर्यसंनिभै:।
आगम्य नगरीं लङ्कामभिजग्मुश्च राघवम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसी समय विश्रवा के पुत्र यक्षराज कुबेर, पितरों सहित यमराज, हजार नेत्रों वाले देवताओं के स्वामी इन्द्र, जल के स्वामी वरुण, तीन नेत्रों वाले भगवान वृषभध्वज महादेव तथा ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ, सम्पूर्ण जगत् के रचयिता ब्रह्माजी, ये सब देवता सूर्य के समान विमानों द्वारा लंकापुरी में आकर श्री रघुनाथजी के पास गए॥2-4॥
 
At the same time, Yaksharaj Kuber, son of Vishrava, Yamraj along with his ancestors, Indra, the lord of gods with a thousand eyes, Varun, the lord of the waters, Lord Vrishabhdhwaj Mahadev with three eyes and Brahmaji, the best among the brahmatists, the creator of the entire world, all these gods came to Lankapuri in sun-like planes and went to Shri Raghunathji. 2-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)