श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.117.16 
सेनानीर्ग्रामणीश्च त्वं बुद्धि: सत्त्वं क्षमा दम:।
प्रभवश्चाप्ययश्च त्वमुपेन्द्रो मधुसूदन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आप देवताओं के सेनापति और ग्रामों के मुखिया हैं। आप बुद्धि, सतोगुण, क्षमा, इन्द्रिय संयम और सृष्टि तथा संहार के कारण हैं। आप उपेन्द्र (वामन) और मधुसूदन हैं॥16॥
 
‘You are the commander of the gods and the head or leader of the villages. You are the cause of wisdom, goodness, forgiveness, control of senses and the cause of creation and destruction. You are Upendra (Vamana) and Madhusudan.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)