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ramayan 6.117.14: रघुनंदन! आप अविनाशी परब्रह्म हैं। आप ब्रह्माण्ड के आदि, मध्य और अन्त में साक्षात् विद्यमान हैं। आप लोकों के परम धर्म हैं। आप विश्वक्सेन और चतुर्भुज श्रीहरि हैं। 14॥   |   ramayan सर्ग 6.117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.117.14 
अक्षरं ब्रह्म सत्यं च मध्ये चान्ते च राघव।
लोकानां त्वं परो धर्मो विष्वक्सेनश्चतुर्भुज:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रघुनंदन! आप अविनाशी परब्रह्म हैं। आप ब्रह्माण्ड के आदि, मध्य और अन्त में साक्षात् विद्यमान हैं। आप लोकों के परम धर्म हैं। आप विश्वक्सेन और चतुर्भुज श्रीहरि हैं। 14॥
 
Ragunandan! You are the indestructible Supreme Being. Truly present in the beginning, middle and end of the universe. You are the supreme religion of the worlds. You are Vishvaksena and the four-armed Shrihari. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)