श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.117.13 
भवान् नारायणो देव: श्रीमांश्चक्रायुध: प्रभु:।
एकशृङ्गो वराहस्त्वं भूतभव्यसपत्नजित्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आप सर्वशक्तिमान भगवान नारायण हैं, चक्र धारण करने वाले हैं, एकदंत वराह हैं, जो पृथ्वी पर निवास करते हैं और देवताओं के भूत और भविष्य के शत्रुओं को जीतते हैं॥13॥
 
‘You are the all-powerful Lord Narayana, holding the discus, the one-toothed Varaah who resides on the Earth and conquers the past and future enemies of the gods.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)