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ramayan 6.117.11: 'देवताओं! मैं अपने को मनुष्य मानता हूँ, दशरथपुत्र राम। हे प्रभु! कृपया मुझे बताएँ कि मैं कौन हूँ और कहाँ से आया हूँ।'॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.117.11 
आत्मानं मानुषं मन्ये रामं दशरथात्मजम्।
सोऽहं यश्च यतश्चाहं भगवांस्तद् ब्रवीतु मे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'देवताओं! मैं अपने को मनुष्य मानता हूँ, दशरथपुत्र राम। हे प्रभु! कृपया मुझे बताएँ कि मैं कौन हूँ और कहाँ से आया हूँ।'॥11॥
 
‘Gods! I consider myself to be a human being, Dasharath's son Ram. Lord! Please tell me who I am and where I have come from.'॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)