श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 117: भगवान् श्रीराम के पास देवताओं का आगमन तथा ब्रह्मा द्वारा उनकी भगवत्ता का प्रतिपादन एवं स्तवन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.117.1 
ततो हि दुर्मना राम: श्रुत्वैवं वदतां गिर:।
दध्यौ मुहूर्तं धर्मात्मा बाष्पव्याकुललोचन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात वानरों और राक्षसों के विलापपूर्ण शब्द सुनकर धर्मात्मा श्री रामजी हृदय में अत्यन्त दुःखी हो गए और नेत्रों में आँसू भरकर कुछ देर तक कुछ सोचते रहे॥1॥
 
Thereafter, on listening to the wailing words of the monkeys and demons, the righteous Sri Rama became very sad in his heart and with tears in his eyes, he kept thinking about something for a while. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)