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ramayan 6.116.22: उस समय श्री रघुनाथजी प्रलयनाशक यमराज के समान लोगों के हृदय में भय उत्पन्न कर रहे थे। उनका कोई भी मित्र उन्हें समझाने, उनसे कुछ कहने या उनकी ओर देखने का साहस नहीं जुटा पा रहा था॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 6.116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.116.22 
नहि रामं तदा कश्चित् कालान्तकयमोपमम्।
अनुनेतुमथो वक्तुं द्रष्टुं वाप्यशकत् सुहृत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्री रघुनाथजी प्रलयनाशक यमराज के समान लोगों के हृदय में भय उत्पन्न कर रहे थे। उनका कोई भी मित्र उन्हें समझाने, उनसे कुछ कहने या उनकी ओर देखने का साहस नहीं जुटा पा रहा था॥ 22॥
 
At that time Shri Raghunathji was creating fear in the hearts of people like Yamraj, the destroyer of doomsday. None of his friends could muster courage to explain to him, say something to him or even look at him.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)