श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.116.20 
एवमुक्तस्तु वैदेह्या लक्ष्मण: परवीरहा।
अमर्षवशमापन्नो राघवं समुदैक्षत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी की यह बात सुनकर शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले लक्ष्मण ने अमर्ष के प्रभाव से श्री रामचन्द्रजी की ओर देखा (वे सीताजी का वह अपमान सहन न कर सके)। 20॥
 
On hearing this from Videhnandini, Lakshmana, the destroyer of enemy warriors, under the influence of Amarsha, looked towards Shri Ramchandraji (he could not tolerate that insult to Sitaji). 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)