श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 116: सीता का श्रीराम को उपालम्भपूर्ण उत्तर देकर अपने सतीत्व की परीक्षा देने के लिये अग्नि में प्रवेश करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.116.18 
चितां मे कुरु सौमित्रे व्यसनस्यास्य भेषजम्।
मिथ्यापवादोपहता नाहं जीवितुमुत्सहे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! मेरे लिए चिता तैयार करो। मेरे दुःख का यही एकमात्र उपचार है। मैं मिथ्या कलंक लगाकर जीवित नहीं रह सकता।॥18॥
 
Sumitra Nandan! Prepare a funeral pyre for me. This is the only cure for my sorrow. I cannot live being tainted by a false stigma.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)