श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.115.9 
विभीषणस्य च तथा सफलोऽद्य परिश्रम:।
विगुणं भ्रातरं त्यक्त्वा यो मां स्वयमुपस्थित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह विभीषण अपने दुर्गुणों से युक्त भाई को त्यागकर स्वयं ही मेरे पास आया है। अब तक उसका प्रयत्न व्यर्थ नहीं गया।॥9॥
 
This Vibhishan abandoned his brother who was full of vices and came to me on his own. His efforts till now have not gone in vain.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)