श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 115: सीता के चरित्र पर संदेह करके श्रीराम का उन्हें ग्रहण करने से इनकार करना और अन्यत्र जाने के लिये कहना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.115.23 
शत्रुघ्ने वाथ सुग्रीवे राक्षसे वा विभीषणे।
निवेशय मन: सीते यथा वा सुखमात्मना॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'सीते! यदि तुम चाहो तो शत्रुघ्न, वानरराज सुग्रीव अथवा राक्षसराज विभीषण के पास रहो। जहाँ भी तुम्हें सुख मिले, वहीं अपना मन लगाओ॥ 23॥
 
‘Sita! If you wish, you can stay with Shatrughna, monkey king Sugreeva or demon king Vibhishan. Wherever you find happiness, concentrate your mind there.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)