Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.114.36: सीता ने अपने प्रियतम के उस सुन्दर मुख को जी भरकर देखा, जिसने सूर्योदय के समय पूर्णिमा को भी लज्जित कर दिया था और जिसके दर्शन से वह इतने दिनों से वंचित थी, और जिससे उसके हृदय को वेदना से मुक्ति मिली। उस समय उसका मुख प्रसन्नता से खिल उठा और वह निर्मल चन्द्रमा के समान सुन्दर लगने लगा। | ramayan सर्ग 6.114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सीता ने अपने प्रियतम के उस सुन्दर मुख को जी भरकर देखा, जिसने सूर्योदय के समय पूर्णिमा को भी लज्जित कर दिया था और जिसके दर्शन से वह इतने दिनों से वंचित थी, और जिससे उसके हृदय को वेदना से मुक्ति मिली। उस समय उसका मुख प्रसन्नता से खिल उठा और वह निर्मल चन्द्रमा के समान सुन्दर लगने लगा।
Sita gazed to her heart's content at the beautiful face of her beloved, which put even the full moon at sunrise to shame and whose sight she had been deprived of for so long, and relieved her heart of the pain. At that time her face blossomed with happiness and began to look as beautiful as the pure moon.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुर्दशाधिकशततम: सर्ग: ॥ १ १४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ चौदहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ १४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥