Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.114.28: ‘विपत्ति के समय, शारीरिक या मानसिक कष्ट के समय, युद्ध में, स्वयंवर में, यज्ञ में या विवाह में स्त्री का दिखाई देना (या दूसरों की दृष्टि में आना) दोष नहीं है।॥28॥ | ramayan सर्ग 6.114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यसनेषु न कृच्छ्रेषु न युद्धेषु स्वयंवरे।
न क्रतौ नो विवाहे वा दर्शनं दूष्यते स्त्रिया:॥ २८॥
अनुवाद
‘विपत्ति के समय, शारीरिक या मानसिक कष्ट के समय, युद्ध में, स्वयंवर में, यज्ञ में या विवाह में स्त्री का दिखाई देना (या दूसरों की दृष्टि में आना) दोष नहीं है।॥28॥
‘It is not a fault for a woman to be seen (or to come in the sight of others) during a calamity, at a time of physical or mental suffering, in a war, at a swayamvara, a yagna or at a wedding.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥