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ramayan 6.114.27: 'घर, वस्त्र (पर्दे आदि) और चारदीवारी आदि स्त्री के लिए पर्दे नहीं हैं। इसी प्रकार लोगों को दूर रखने का क्रूर व्यवहार भी स्त्री के लिए आवरण या पर्दा नहीं है। पति से प्राप्त सम्मान और स्त्री का अपना सदाचार - ये ही उसके लिए आवरण हैं।॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.114.27 
न गृहाणि न वस्त्राणि न प्राकारस्तिरस्क्रिया।
नेदृशा राजसत्कारा वृत्तमावरणं स्त्रिया:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'घर, वस्त्र (पर्दे आदि) और चारदीवारी आदि स्त्री के लिए पर्दे नहीं हैं। इसी प्रकार लोगों को दूर रखने का क्रूर व्यवहार भी स्त्री के लिए आवरण या पर्दा नहीं है। पति से प्राप्त सम्मान और स्त्री का अपना सदाचार - ये ही उसके लिए आवरण हैं।॥27॥
 
‘The house, clothes (curtains etc.) and boundary walls etc. are not curtains for a woman. Similarly, the cruel behaviour of keeping people away also does not serve as a cover or curtain for a woman. The respect received from the husband and the woman's own good conduct - these are the covers for her.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)