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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.114.23 
तेषामुत्सार्यमाणानां नि:स्वन: सुमहानभूत्।
वायुनोद्‍धूयमानस्य सागरस्येव नि:स्वन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जैसे वायु के झोंकों से क्षुब्ध होकर समुद्र का गर्जन बढ़ जाता है, उसी प्रकार जब वानरों आदि को वहाँ से हटा दिया गया, तो वहाँ महान् कोलाहल मच गया। 23.
 
Just as the roar of the sea increases when it is agitated by the blows of wind, similarly, when the monkeys etc. were removed from there, a great uproar was created there. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)