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ramayan 6.114.18: तत्पश्चात् श्री रघुनाथजी 'सीताजी सवारी करके आई हैं' ऐसा तर्कपूर्वक विचार करके प्रसन्न नहीं हुए और विभीषण से इस प्रकार बोले- 18॥   |   ramayan सर्ग 6.114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 114: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण का सीता को उनके समीप लाना और सीता का प्रियतम के मुखचन्द्र का दर्शन करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.114.18 
ततो यानगतां सीतां सविमर्शं विचारयन्।
विभीषणमिदं वाक्यमहृष्टो राघवोऽब्रवीत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री रघुनाथजी 'सीताजी सवारी करके आई हैं' ऐसा तर्कपूर्वक विचार करके प्रसन्न नहीं हुए और विभीषण से इस प्रकार बोले- 18॥
 
After that, Shri Raghunathji was not happy after logically thinking about the fact that 'Sita has come on a ride'. He spoke to Vibhishan thus: 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)