श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 113: हनुमान्जी का सीताजी से बातचीत करके लौटना और उनका संदेश श्रीराम को सुनाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.113.52 
तामेवमुक्त्वा भ्राजन्तीं सीतां साक्षादिव श्रियम्।
आजगाम महातेजा हनूमान् यत्र राघव:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मी के समान सुशोभित सीता देवी से ऐसा कहकर तेजस्वी हनुमान्‌जी उस स्थान पर लौट गए जहाँ श्री रघुनाथजी विराजमान थे॥52॥
 
Saying this to Sita Devi, who was adorned like Goddess Lakshmi, the brilliant Hanuman ji returned to the place where Shri Raghunath ji was seated. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)