Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.113.31-32: 'तुम मेरी तरह पतिव्रता स्त्री हो और अशोक वाटिका में कष्ट सह रही हो, और भयंकर रूप, क्रूर नेत्रों वाली, भयंकर आचरण वाली ये क्रूर राक्षसियाँ तुम्हें बार-बार कठोर शब्दों से डाँट रही थीं। रावण के आदेश से वे जो कुछ कहती थीं, वह सब मैंने यहाँ रहते हुए सुना है। | ramayan सर्ग 6.113: हनुमान्जी का सीताजी से बातचीत करके लौटना और उनका संदेश श्रीराम को सुनाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम मेरी तरह पतिव्रता स्त्री हो और अशोक वाटिका में कष्ट सह रही हो, और भयंकर रूप, क्रूर नेत्रों वाली, भयंकर आचरण वाली ये क्रूर राक्षसियाँ तुम्हें बार-बार कठोर शब्दों से डाँट रही थीं। रावण के आदेश से वे जो कुछ कहती थीं, वह सब मैंने यहाँ रहते हुए सुना है।
‘You, a devoted wife like me, were suffering in the Ashok Vatika and these cruel demonesses with fierce looks and cruel eyes, with terrifying behaviour, were repeatedly scolding you with harsh words. I have heard all the things they used to tell you on the orders of Ravana, while staying here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥