श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 113: हनुमान्जी का सीताजी से बातचीत करके लौटना और उनका संदेश श्रीराम को सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.113.18 
नहि पश्यामि सदृशं चिन्तयन्ती प्लवंगम।
आख्यानकस्य भवतो दातुं प्रत्यभिनन्दनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे वीर वानर! मुझे ऐसा शुभ समाचार सुनाने के लिए मैं तुम्हें कुछ पुरस्कार देना चाहता हूँ; परन्तु बहुत सोचने पर भी मुझे उसके योग्य कुछ नहीं मिलता॥18॥
 
Valiant monkey! I want to give you some reward for telling me such good news; but even after thinking a lot I don't find anything worthy of it.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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