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श्लोक 6.113.18  |
नहि पश्यामि सदृशं चिन्तयन्ती प्लवंगम।
आख्यानकस्य भवतो दातुं प्रत्यभिनन्दनम्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हे वीर वानर! मुझे ऐसा शुभ समाचार सुनाने के लिए मैं तुम्हें कुछ पुरस्कार देना चाहता हूँ; परन्तु बहुत सोचने पर भी मुझे उसके योग्य कुछ नहीं मिलता॥18॥ |
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| Valiant monkey! I want to give you some reward for telling me such good news; but even after thinking a lot I don't find anything worthy of it.॥ 18॥ |
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