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अथोवाच स काकुत्स्थ: समीपपरिवर्तिनम्॥ ८॥
सौमित्रिं सत्त्वसम्पन्नं लक्ष्मणं दीप्ततेजसम्।
विभीषणमिमं सौम्य लङ्कायामभिषेचय॥ ९॥
अनुरक्तं च भक्तं च तथा पूर्वोपकारिणम्।
अनुवाद
वहाँ आकर रघुनाथजी ने अपने निकट खड़े हुए बल और तेज से परिपूर्ण सुमित्रानन्दन लक्ष्मण से कहा- 'सौम्य! अब तुम लंका में जाकर इन विभीषण का राज्याभिषेक करो; क्योंकि ये मेरे प्रेमी, भक्त और प्रथम सहायक हैं।'
Coming there, Raghunath ji said to Lakshman, Sumitranandan, who was full of strength and radiant energy, standing near him – 'Soumya! Now you go to Lanka and coronate this Vibhishana; Because they are my lovers, devotees and first helpers. 8-9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥