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ramayan 6.111.66-67h: महाराज! इस धरती पर पतिव्रता पत्नी के आँसू व्यर्थ नहीं गिरते, यह कहावत लगभग आप पर भी चरितार्थ हुई है।   |   ramayan सर्ग 6.111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.111.66-67h 
प्रवाद: सत्यमेवायं त्वां प्रति प्रायशो नृप॥ ६६॥
पतिव्रतानां नाकस्मात् पतन्त्यश्रूणि भूतले।
 
 
अनुवाद
महाराज! इस धरती पर पतिव्रता पत्नी के आँसू व्यर्थ नहीं गिरते, यह कहावत लगभग आप पर भी चरितार्थ हुई है।
 
Maharaj! The tears of a faithful wife do not fall in vain on this earth, this saying has almost exactly happened to you. 66 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)