श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 111: मन्दोदरी का विलाप तथा रावण के शव का दाह-संस्कार  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  6.111.63-64h 
अयं क्रीडासहायस्तेऽनाथो लालप्यते जन:॥ ६३॥
न चैनमाश्वासयसि किं वा न बहुमन्यसे।
 
 
अनुवाद
'प्रभु! आपकी सहचरी मन्दोदरी आज अनाथ होने के कारण रो रही है। आप उसे सांत्वना क्यों नहीं देते या उसका आदर क्यों नहीं करते?'
 
‘Lord! Your playmate Mandodari is today crying for being orphaned. Why don't you give her reassurance or show her more respect?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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