| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 110: रावण की स्त्रियों का विलाप » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 6.110.4  | आर्यपुत्रेति वादिन्यो हा नाथेति च सर्वश:।
परिपेतु: कबन्धाङ्कां महीं शोणितकर्दमाम्॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | वे सब लोग ‘हे आर्यपुत्र! हे मेरे स्वामी!’ चिल्लाते हुए युद्धभूमि में गिरते-पड़ते इधर-उधर भटकने लगे, जहाँ सिरहीन शव पड़े थे और रक्त का कीचड़ जम गया था॥4॥ | | | | Shouting 'Oh, Aryaputra! Oh, my lord!' all of them started wandering, falling all around on the battlefield where headless corpses were lying and the sludge of blood had solidified. ॥4॥ | | ✨ ai-generated | | |
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