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श्लोक 25
श्लोक
6.110.25
नैवार्थेन च कामेन विक्रमेण न चाज्ञया।
शक्या दैवगतिर्लोके निवर्तयितुमुद्यता॥ २५॥
अनुवाद
इस संसार में फल देने वाले भगवान के नियमों को धन, इच्छा, पराक्रम, आज्ञा या बल से भी कोई नहीं बदल सकता।॥25॥
‘In this world, no one can change the laws of God that are meant to give results, by money, desire, valour, orders or even by power.’॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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