श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 110: रावण की स्त्रियों का विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.110.21 
वृत्तकामो भवेद् भ्राता रामो मित्रकुलं भवेत्।
वयं चाविधवा: सर्वा: सकामा न च शत्रव:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि सीताजी को लौटा दिया जाता, तो तुम्हारे भाई विभीषण की इच्छा पूरी हो जाती, भगवान राम हमारे मित्रों के पक्ष में आ जाते, हमें विधवा न होना पड़ता और हमारे शत्रुओं की इच्छाएँ पूरी न होतीं॥ 21॥
 
‘Had Sita been returned, your brother Vibhishan's wish would have been fulfilled, Lord Rama would have joined our friends' side, we would not have to become widows and the desires of our enemies would not have been fulfilled.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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