vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 110: रावण की स्त्रियों का विलाप
»
श्लोक 17
श्लोक
6.110.17
एवं वदन्त्यो रुरुदुस्तस्य ता दु:खिता: स्त्रिय:।
भूय एव च दु:खार्ता विलेपुश्च पुन: पुन:॥ १७॥
अनुवाद
ऐसा कहकर रावण की दुःखी पत्नियाँ अत्यन्त विलाप करने लगीं और शोक से अभिभूत होकर बार-बार विलाप करने लगीं॥17॥
Saying these things, Ravana's sorrowful wives began to weep profusely and, overwhelmed with grief, they began to lament again and again.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×