| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 110: रावण की स्त्रियों का विलाप » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 6.110.10  | काचिदङ्के शिर: कृत्वा रुरोद मुखमीक्षती।
स्नापयन्ती मुखं बाष्पैस्तुषारैरिव पङ्कजम्॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | कुछ स्त्रियाँ अपने पति का सिर गोद में लेकर, उनके मुख को देखकर तथा उनके मुख को ओस की बूंदों से कमल के समान आँसुओं से नहलाकर रोने लगीं। | | | | Some, taking the head of their husband in their lap, looking at his face and bathing his face with teardrops like lotus from dewdrops, began to weep. | | ✨ ai-generated | | |
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