श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 110: रावण की स्त्रियों का विलाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.110.1 
रावणं निहतं श्रुत्वा राघवेण महात्मना।
अन्त:पुराद् विनिष्पेतू राक्षस्य: शोककर्शिता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री रघुनाथजी द्वारा रावण के मारे जाने का समाचार सुनकर राक्षसियाँ शोक से व्याकुल होकर भीतर के भवन से बाहर चली गईं॥1॥
 
Upon hearing the news of Ravana being killed by the great soul Sri Raghunath, the demonesses, overwhelmed with grief, left the inner palace. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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