| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 11: रावण और उसके सभासदों का सभाभवन में एकत्र होना » श्लोक 27 |
|
| | | | श्लोक 6.11.27  | ततो महात्मा विपुलं सुयुग्यं
रथं वरं हेमविचित्रिताङ्गम्।
शुभं समास्थाय ययौ यशस्वी
विभीषण: संसदमग्रजस्य॥ २७॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात् महाप्रतापी महात्मा विभीषण भी सुन्दर, विशाल, उत्तम और शुभ घोड़ों से जुते हुए स्वर्णजटित रथ पर सवार होकर अपने बड़े भाई के दरबार में पहुँचे॥ 27॥ | | | | Thereafter, the illustrious Mahatma Vibhishana too, riding on a golden-studded chariot drawn by beautiful horses, large, excellent and auspicious, reached the court of his elder brother.॥ 27॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|